वेदांत ओडिशा में एक लाख करोड़ रुपये और निवेश करेगी, दो लाख नए रोजगार पैदा करेगी
मुंबई, अक्टूबर 19: पिछले दो दशकों से ओडिशा में एक भागीदार के रूप में वेदांत ने 1 लाख करोड़ रुपये...
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दिल्ली, अक्टूबर 09: राज घराना, जो उच्च गुणवत्ता वाले कांसा, पीतल और तांबे के बर्तनो के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध...
दिल्ली, अक्टूबर 07: भारत के प्रतिस्पर्धी ई-कॉमर्स क्षेत्र में एक नया नाम तेजी से उभर कर सामने आ रहा है।...
मेरठ (उत्तर प्रदेश), अक्टूबर 04: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बाजार में सैकड़ो पुस्तकें हैं लेकिन इन सभी पुस्तकों...
दिल्ली , सितम्बर 20: हाफले अपने एकीकृत डिजिटल होम सिक्योरिटी सॉल्यूशंस की रेंज के साथ घर की सुरक्षा के लिए...
दिल्ली , सितम्बर 20: हाफले की लूक्स रेंज ने पिछले 10 वर्षों से फर्नीचर में लाइटिंग की मांगों और नेटवर्किंग और...
नई दिल्ली, सितम्बर 20: भारत में छात्र आत्महत्या के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं। जितने भारत में टॉपर्स निकल रहे हैं, उससे 10 गुना ज्यादा बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं। सिर्फ 10वीं-12वीं या कॉलेज के बच्चों के ही नहीं, बल्कि इससे भी ज्यादा कक्षा 4 से लेकर कक्षा 9 तक के बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं। इसका जिम्मेदार कौन है? माता-पिता, स्कूल या खुद बच्चे? इसी विषय पर हमारी बातचीत BIYZEN Youth Services के डायरेक्टर श्री अमनदीप से हुई।अमनदीप ने इस मुद्दे को बहुत गंभीरता से समझाया।उन्होंने बताया कि भारत आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़ रहा है, और इस बदलाव के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। हर इंसान को तनाव का सामना करना पड़ता है, चाहे वह 8 साल का बच्चा हो या 60 साल का वयस्क। पिछले दो दशकों में मानसिक सहनशीलता की कमी के कारण कई बदलाव हुए हैं, जिससे तनाव और आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। BIYZEN Youth Services हजारों बच्चों को आत्महत्या से बचा चुका है और उन्हें अपनी सेवाएं प्रदान कर चुका है। उनकी Stress Reliever Shield बच्चों को तनाव और आत्महत्या से बचाती है, जिससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन के मूल्यों को समझना आसान हो जाता है। अमनदीप ने बताया कि जब वह किसी माता-पिता से बात करते हैं, तो सभी यही कहते हैं कि “हमारे बच्चों को किसी प्रकार का तनाव नहीं है।” लेकिन जब उन्हें यह बताया जाता है कि जिन बच्चों ने आत्महत्या की, उनके माता पिता का भी यही जवाब था, तब उन्हें समझ आता है कि किसी की मानसिक स्थिति को बिना काउंसलिंग के समझा नहीं जा सकता, क्योंकि तनाव बताकर नहीं आता। स्कूलों में इस सेवा को देने पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिलती हैं। अमनदीप ने बताया कि जब वह स्कूलों में जाकर अपनी सेवाएं बच्चों को देने की कोशिश करते हैं, तो कुछ स्कूल इसे मुफ्त में भी बच्चों तक नहीं पहुँचने देते। दुःख की बात तो यह है कि जिन स्कूलों के बच्चे आत्महत्या कर चुके होते हैं, वे भी माता-पिता को दोषी ठहराकर बच्चों तक यह सेवा नहीं पहुँचने देते। कुछ स्कूल इस सेवा का शुल्क बहुत अधिक बताकर मना कर देते हैं, तो कुछ यह कहकर मना करते हैं कि “हमारे बच्चों को इसकी जरूरत नहीं है, बाद में आना।”...
मेरठ, सितम्बर 19: अनेक विशेषताओं से युक्त सर्वश्रेष्ठ परीक्षा मार्गदर्शक, इसका कोई विकल्प नहीं 100% सफलता के लिए परीक्षार्थी Vidya...
सूरत, सितम्बर 16: राजेश गांगानी urf Raj Baasira – भावनगर के एक छोटे से गांव से शुरू हुई कहानी फिल्म...
केवड़िया ने 1000 से अधिक निःसंतान दम्पतियों के जीवन में खुशियाँ लाने में मदद की है। सूरत, सितम्बर 14: एसजी...