Month: February 2026

इटावा में उच्च शिक्षा को मिल रही नई दिशा: अनुज मोंटी यादव की पहल से बढ़ रहे अवसर

जसवंतनगर (इटावा) उत्तर प्रदेश ,फरवरी 20: उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लंबे समय से उच्च शिक्षा की गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं...

श्री हनुमच्छिव दुर्गा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव भव्य एवं ऐतिहासिक रूप से सम्पन्न

पश्चिमी चंपारण (बिहार), फरवरी 18: ग्राम तरकुलवा, पोस्ट बेलवा मोड़, प्रखंड बगहा, जिला पश्चिमी चंपारण (बिहार) में श्री सीताराम हनुमत् सेवा ट्रस्ट...

इतिहास से भविष्य तक: हरि चंदना आईएएस की विरासत संरक्षण यात्रा

हैदराबाद (तेलंगाना), फरवरी 17: उस्मानिया विश्वविद्यालय प्रशासन और हैदराबाद मेट्रोपोलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HMDA) के सहयोग से, परिसर में स्थित अतीत...

द वायरल वेलोसिटी: Angelic Intelligence की 6 महीनों में 10X ग्रोथ की कहानी

नई दिल्ली, फरवरी 16: Orchestro.AI, के संस्थापक और CEO शेखर नटराजन, Angelic Intelligence की अभूतपूर्व विकास यात्रा के बारे में...

द लास्ट सेल्फी – डिजिटल कर्ज़ और परिवारों का विनाश

भोपाल (मध्य प्रदेश), फरवरी 16: Orchestro.AI, के संस्थापक और CEO शेखर नटराजन इस लेख में डिजिटल कर्ज़ और सूदखोरों के...

मरने के लिए सात मिनट – गिग इकोनॉमी के टूटते शरीर

हैदराबाद (तेलंगाना), फरवरी 16: Orchestro.AI, के संस्थापक और CEO शेखर नटराजन इस लेख में बताते हैं कि कैसे एल्गोरिदम ने...

एसजीटी यूनिवर्सिटी ने छात्रवृत्ति वितरण समारोह आयोजित किया

गुरुग्राम (हरियाणा), फरवरी 13: श्री गुरु गोबिंद सिंह ट्राइसेन्टीनरी यूनिवर्सिटी (एसजीटी यूनिवर्सिटी), गुरुग्राम ने अपने स्कॉलर्स काउंसिल के सहयोग से,...

प्रशांत मिश्रा: उद्योग नेतृत्व से शिव साधना की ओर — अनेक सफल उपक्रमों की प्रेरक यात्रा

नई दिल्ली, फरवरी 11: हर सफल उद्योगपति के पास उपलब्धियों की सूची होती है, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी...

वेदांता एल्युमिनियम ने लांजीगढ़ क्षेत्र में कैंसर जागरूकता अभियान का नेतृत्व किया

कलाहांडी (ओडिशा), फरवरी 09: वेदांता एल्युमिनियम, जो भारत की सबसे बड़ी एल्युमिनियम उत्पादक कंपनी है, ने हाल ही में अपने लांजीगढ़...

भूली-बिसरी विरासत में नई जान: हरि चंदना आईएएस की दृष्टि

हैदराबाद (तेलंगाना), फरवरी 09: हैदराबाद के ऐतिहासिक उस्मानिया विश्वविद्यालय परिसर में स्थित अतीत की एक भूली हुई धरोहर — मह लका बाई बावड़ी — आज दशकों की उपेक्षा के बाद पुनर्जीवित होकर फिर से अपने वैभव में खड़ी है। कभी मलबे से भरी और समय की धूल में खोई यह 18वीं सदी की संरचना अब सावधानीपूर्वक संरक्षण और पारिस्थितिक पुनर्जीवन के माध्यम से एक जीवंत विरासत स्थल में बदल चुकी है। इस पुनरुत्थान के केंद्र में हैं हरि चंदना आईएएस, जिनकी प्रशासनिक सोच निरंतर स्थिरता, संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता को जोड़ती रही है। यह बावड़ी का पुनर्जीवन कोई एकल उपलब्धि नहीं, बल्कि तेलंगाना भर में विरासत संरक्षण की उस निरंतर परंपरा का हिस्सा है, जिसे उन्होंने नेतृत्व प्रदान किया है।...